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Agni Sukta: ऋग्वेद के प्रथम देवता अग्निदेव की महिमा - डॉ. गुलाब कोठारी द्वारा रचित | पत्रिका पब्लिकेशन का अनूठा संग्रह
Agni Sukta: ऋग्वेद के प्रथम देवता अग्निदेव की महिमा - डॉ. गुलाब कोठारी द्वारा रचित | पत्रिका पब्लिकेशन का अनूठा संग्रह
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अग्नि देव को ब्रह्मांड की शक्ति माना गया है। ऋग्वेद का प्रथम सूक्त अग्नि देव को समर्पित है। वेद में यज्ञ विद्या है। यज्ञ में अग्नि में सोम की आहुति दी जाती है। यह यज्ञ सर्वव्यापक रूप में प्रकृति में स्वयं चल रहा है। वेद भी एक तत्त्व के रूप में इस यज्ञ में सहायता कर रहे हैं। ऋक्, यजुः और साम अग्नि से जुड़े वेद हैं और अथर्व वेद सोम से जुड़ा है। अग्नि के चयन से वस्तु का निर्माण होता है। अग्नि सोम की आहुति से वर्धमान रहता है। बहिर्मुखता के विस्तार से अग्नि तथा अन्तर्मुखता के संकोच से सोम बनता है। Delve into the cosmic role of Agni as the universal energy and the essence of Vedic Yajna in Agni Sukt by Dr. Gulab Kothari — exploring the divine interplay of Agni and Soma in creation and consciousness.
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