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Yog Aur Pran Tatva: योग और प्राण तत्व पर आध्यात्मिक दृष्टिकोण | Yoga & Life Energy Principles | Hindi Spiritual Book by Dr. Gulab Kothari | Patrika Publication
Yog Aur Pran Tatva: योग और प्राण तत्व पर आध्यात्मिक दृष्टिकोण | Yoga & Life Energy Principles | Hindi Spiritual Book by Dr. Gulab Kothari | Patrika Publication
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योग तभी घटता है जब व्यक्ति का लोप हो जाए। यही रूपान्तरण है। योग शब्द का अर्थ केवल जोडऩा ही नहीं है। घटाना भी है। योग एक प्रक्रिया है जो सौ साल के जीवन को लक्ष्य प्राप्ति करके सार्थक बनाता है। योग के दो मुख्य लक्ष्य रहते हैं-पुराने संस्कारों से मुक्त होना तथा नए संस्कारों का निर्माण नहीं होने देना। मन, प्राण, वाक् का अविनाभाव संबंध है। तीनों जुड़े हुए हैं। प्राण के द्वारा ही इच्छाशक्ति जाग्रत होती है। और वाक् की प्राप्ति के बाद पूर्ण मानी जाती है। इनकी पूर्णता के लिए प्राण का अर्क यानी संचरण होता है। उस अर्क या संचरण को ही प्राण कहते हैं। प्रस्तुत पुस्तक में ऋषि, ब्रह्म, वैराग्य,चाक्षुष कृष्ण, आनन्द आदि पर भी चिन्तन-परक आलेख हैं। An insightful guide on the deeper meaning of Yoga, exploring self-dissolution, transformation, Prana, speech, and ancient Vedic wisdom for spiritual growth and liberation.
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