Patrika Publications
आद्या | Aadhya – A Poetic Journey of Divine Feminine, Non-duality & Self-Realization by Dr. Gulab Kothari | Patrika Publication | Paperback: Hindi (1)
आद्या | Aadhya – A Poetic Journey of Divine Feminine, Non-duality & Self-Realization by Dr. Gulab Kothari | Patrika Publication | Paperback: Hindi (1)
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"आद्या-1"नर हो अथवा नारी, चलाती माया ही है। वही तो स्वरूप निर्माण करती है, प्रतिष्ठित रखती है और अन्त में संहार करती है। नाम शिव का होता है। क्योंकि वह शिव की ही शक्ति है। अपने स्वयं के नाम को अलग से महत्त्व नहीं देती। सृष्टि का सारा कर्ताभाव उसका है। तब हर युगल सृष्टि को भी क्यों न इसी दृष्टि से देखा जाए। अर्द्धनारीश्वर कैसे दोनों में कार्य करता है। नवजात शिशु के मन में स्वयं की कोई कामना नहीं होती। इन्द्रियों के कार्यों का बोध नहीं होता। स्वयं की शब्दावली भी नहीं होती। बस अनाहतनाद के सहारे अभिव्यक्ति की अनन्त यात्रा जारी रहती है। इसी में सूक्ष्म भरा रहता है। यही धीरे-धीरे स्थूल में प्रकट होता रहता है। समय के साथ अनन्य रूपों में परिवर्तित होता रहता है। मन-बुद्धि-अहंकार के आवरण चढ़ने लगते हैं। अच्छे-बुरे भावों का निर्णय होने लगता है। प्रारब्ध प्रभाव दिखाता है।..... आद्या- काव्य- ग्रन्थ की यही भावभूमि है।
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