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Vishnu Sukta: वैदिक देवता विष्णु का गूढ़ रहस्य | Scientific Insight into Vedic Vishnu | Dr. Gulab Kothari | Patrika Publication
Vishnu Sukta: वैदिक देवता विष्णु का गूढ़ रहस्य | Scientific Insight into Vedic Vishnu | Dr. Gulab Kothari | Patrika Publication
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क्या आप जानना चाहते हैं कि त्रिलोकी को तीन पगों में नापने वाले विष्णु की गाथा वेदों में कैसे गूंजती है? विष्णु-सूक्त ऋग्वेद के पहले मंडल का 154 वां सूक्त है। वैदिक देवताओं में विष्णु उच्च स्थान पर प्रतिष्ठित हैं। महाभारत में विष्णु की व्यापकता बताई गई है। विष्णु देवता की गणना द्युलोकीय देवताओं में होती है। विष्णुदेव के तीन पाद वर्णित हैं। तीन डगों से त्रिलोकी को नापकर विष्णु आपोमय लोक अथवा सोमलोक तक पहुंचकर वहीं शयन करते हैं। विष्णुदेव द्वारा ही यज्ञ वेदिका की परिकल्पना की गई थी। पुराणों में विष्णु का वर्णन सूर्य के रूप में भी है। वेद का विष्णु पुराणों तक आते-आते एक ऐसा धार्मिक देवता बन गया जो वैदिक देवताओं में वर्तमान में सबसे अधिक पूजा जाता है। विष्णु सूक्त (कर्पूर-भाष्य) में विष्णु के संदर्भ में वैदिक वाङ्गय एवं भारतीय दर्शन के अध्येता गुलाब कोठारी ने गहन अध्ययन करके इसका वर्तमान परिप्रेक्ष्य में वैज्ञानिक विवेचन किया है। Explore the cosmic vision of Vishnu through a modern scientific lens as Dr. Gulab Kothari delves deep into the Vedic verses of Vishnu Sukta with insightful commentary.
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